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साईं भक्त कविता: बाबा ने सुनी दिल की इच्छा

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साईं भक्त कविता कहती हैं: प्रिय हेतल, ओम साई राम! आप अपने ब्लॉग के माध्यम से मानव जाति के लिए एक अद्भुत सेवा कर रही हैं। आप प्रत्येक पोस्टिंग के साथ हम सभी की हमारे प्यारे बाबा की ओर एक और कदम बढ़ने में मदद कर रही हैं। बाबा आपको हमेशा आशीर्वाद दें और आपको दुनिया भर में उनकी प्रसिद्धि और महिमा को फैलाने की अनुमति दे। जय साईं राम।

मैंने स्वयं बाबा की कई लीलाओं का अनुभव किया है और लंबे समय से आपको लिखना चाहती थी। लेकिन ऐसा लग रहा है कि बाबा चाहते थे कि मैं आज लिखूं और उनके आशीर्वाद से मैं अपना एक अनुभव पोस्ट कर रही हूं।

मैं पिछले कुछ वर्षों से अक्सर शनिवार, कभी-कभी गुरुवार को, अपने घर के पास वाले शिरडी साईं बाबा मंदिर में जाती हूँ। कुछ समय बाद 2007 में, मुझे पता चला कि वहाँ मंदिर के पुजारी जी के मार्गदर्शन में, भक्त बाबा की एक छोटी चांदी की मूर्ति का अभिषेक करते हैं। मुझे वो जानकर ख़ुशी हुई और मेरी इच्छा हुई कि मेरे परिवार के सदस्यों अपने-अपने जन्मदिन पर इस तरह से बाबा की सेवा करें।

पिछले नवंबर में मेरे पति के जन्मदिन पर हमने पुजारी से अभिषेक करने की अनुमति का अनुरोध किया, और पहले से ही बुकिंग करवा ली थी। पुजारी द्वारा बताए अनुसार हमें सुबह 10.00 बजे मंदिर में होना था लेकिन कुछ कारणों से देरी हो गई। मैं मन ही मन थोड़ी दुखी थी क्योंकि मैं बाबा को अर्पित करने के लिए कुछ मिठाई खरीदना चाहती थी लेकिन क्यूँकि पहले ही देर हो चुकी थी, मैं चुप रही। अभिषेक पूजा के लिए मेरे माता-पिता और बहन भी हमारे साथ थे। मेरी बहन दर्शन करने के बाद बैंक में कुछ काम पूरा करने के लिए निकल गई। उसके बाद हम पूजा के लिए बैठ गए। आम तौर पर पुजारी सभी नविद्दया, यानी चावल, दूध आदि की व्यवस्था करते हैं और उन्हें तैयार रखते हैं। अब बाबा की लीला देखें - उस दिन, पूजा के बीच में पुजारी ने मुझसे पूछा कि “क्या कोई मिठाई लेकर आई हो?” जब मैंने नकारात्मक उत्तर दिया, तो उन्होंने कहा कि “कोई बात नही और बाकी पूजा के साथ आगे बढ़ें”। मुझे अब बहुत दुःख हुआ और समझ नही आ रहा था की मैं क्या करूँ। मेरी माँ ने मेरी स्तिथि को समझा और तुरंत मेरा मोबाइल लिया और मेरी बहन को फ़ोन लगाया।

उन्होंने उससे कहा कि वह कुछ मीठा लेकर आए। फिर उन्होंने मुझसे कहा कि “चिंता मत करो, तुम्हारी बहन कुछ ले आएगी।” मेरे दिमाग में एक विचार आया कि काश वो काजू कतली लेकर आए क्योंकि वह मेरी पसंदीदा मिठाई है और मैं बाबा को वही अर्पित करना चाहती थी। मैंने अपनी बहन को वो कहने के लिए एक एसएमएस टाइप किया लेकिन उसे डिलीट कर दिया। मुझे बाबा पर पूरा विश्वास था और जानती थी कि बाबा अपने अनुसार सारा काम करवा लेंगे, इसलिए मैंने थोड़ी चैन की साँस ली।

कुछ ही समय में, मेरी बहन हाथ में एक बॉक्स लेकर पहुंची। पैकिंग बहुत आकर्षक थी और ऐसा लग रहा था की वो हमाए एरिया की सामान्य मिठाई की दुकानों से अलग थी। मैं सोच रही थी कि वो कहाँ से, क्या ख़रीद कर लाई थी। मैं इस बात पर शांत थी कि बाबा ने उसे वही से मँगवाया होगा जहाँ से वो चाहते थे, और बेसब्री से पुजारी की के बॉक्स को खोलने का इंतजार कर रही थी। और हो क्या था, उस बोकस में काजू कतली ही थी! मैं खुशी से इतना अभिभूत थी कि मेरी आँखों में आँसू भर आए और मैंने अपनी इच्छा को सच करने के लिए बाबा को धन्यवाद दिया। कुछ लोगों के लिए यह एक संयोग के रूप में प्रतीत हो सकता है, लेकिन हमारे लिए यह हमारे प्यारे बाबा की सरासर लीला और आशीर्वाद था।

यह सच है कि बाबा हमेशा अपने भक्तों की इच्छाओं को पूरा करने का वचन निभाते हैं, और जैसा कि साईं सच्चरित्र में उल्लेख किया गया है, जब हम भूल जाते हैं कि हमे क्या देने था वह हमें दयापूर्वक याद दिलाते हैं । मैं उनसे प्रार्थना करती हूं कि हम हमेशा उनके पवित्र चरणो में समर्पित रखें और हमेशा हमारे साथ रहें !!

ओम साई राम

कविता


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