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साईं भक्त सचिन: बाबा ने अपने घर के पास नौकरी दी

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साईं भक्त सचिन कहते हैं: साईं भक्त सचिन जी के अनुभव को आगे बढ़ाते हुए, इस पोस्ट में उन्होंने बताया कि किस प्रकार लीला रचकर बाबा ने उन्हें अपने पास ही रखा। यह साईं भक्त सचिन द्वारा अनुभव की गई पूरी लीला का अंतिम भाग है। मैं भक्तों से अनुरोध करती हूं कि पहले, भाग-1 और भाग-2 पढ़ें और फिर इस पोस्ट को पढ़ें।

जैसा कि मैंने अपने पिछले पोस्ट में साझा किया था, सपने के द्वारा बाबा ने मुझे आश्वासन दिया था कि मैं प्रशिक्षण में उत्तीर्ण हो जाऊंगा। अब मैं इस अनुभव के अंतिम चरण को प्रस्तुत करता हूँ। जैसा कि मैंने आप सभी से साझा किया था कि मैंने एक व्यक्ति के अनुभव को पढ़ा था, जिसने बाबाजी की कृपा से पुणे में नौकरी प्राप्त की थी।

'इनफ़ोसिस' कार्यालय भी पुणे में स्थित है और मुझे लगने लगा कि पुणे में मेरी पोस्टिंग हो जाएगी। मैंने अपने एक मित्र (रजत) को इस बारे में बताया। वह भी साईं बाबा का बड़ा भक्त है। मुझे पूरा यकीन था कि मुझे पुणे में पोस्टिंग मिलेगी, जो अनुभव मैंने पढ़ा था वह सच होने वाला था। आखिरकार वह दिन आ गया जब हम सभी को हमारी पोस्टिंग मिली। और बड़ी विचित्र बात हुई मुझे बंगलोरे में पोस्टिंग मिली! लेकिन यह जानकार मैं बहुत उदास हो गया क्योंकि मैं हमेशा शिरडी के पास रहना चाहता था और पुणे के बजाय मुझे बैंगलोर के लिए चुना गया था। मुझे काफी धक्का लगा इस बात से, मैंने सोचा कि मेरा पूरा प्रशिक्षण व्यर्थ हो गया है क्योंकि मुझे पुणे में पोस्टिंग नहीं मिली। फिर से मुझे लगा की मैं बाबाजी से दूर हो जाऊंगा। मैं अपने कमरे में गया और देखा कि मेरा रूम-मेट मौजूद नहीं था। मैंने दरवाजा बंद कर दिया और अपने कमरे में बाबाजी के मंदिर के पास खड़ा हो गया। फिर मैं बाबाजी पर गुस्सा होकर उनपर चिल्लाना शुरू कर दिया और उनसे कहा कि मैं बैंगलोर में नहीं रहना चाहता, मैं सिर्फ शिरडी के पास रहना चाहता हूं, बाबाजी से 20-25 मिनट तक मैं झगड़ता रहा। फिर अंत में मुझे लगा कि यदि बाबाजी ने मुझे इस प्रशिक्षण में उत्तीर्ण किया है, तो अब वे ही मुझे पुणे में पोस्टिंग देने के लिए कुछ करेंगे।

अगली सुबह जब मैं नींद में था तो मुझे मेरे दोस्त साहिल का फोन आया। उसने मुझसे पूछा कि क्या मैं पुणे में स्थानांतरण (ट्रांसफर) चाहता हूं। मैं यह सुनकर हैरान रह गया और तुरंत उससे मिलने चला गया। उसने मुझे बताया कि एक व्यक्ति है जो बैंगलोर में रहना चाहता है और मैं उसके साथ स्वैप कर पुणे जा सकता हूं। जो कुछ भी हुआ वह तो मेरे विचार धारा से काफी दूर था, क्योंकि ऐसे बहुत सारे व्यक्ति थे जो हर हाल में पुणे में पोस्टिंग की कोशिश कर रहे थे। वे इसके लिए पैसे देने के लिए भी तैयार थे। यह कैसे संभव हुआ कि मैंने कुछ नहीं किया फिर भी यह अवसर मुझे मिला। फिर मुझे पिछली रात की बात याद आई जो मैं बाबाजी से झगड़ रहा था और तब मुझे समझ आया की यह सब बाबाजी की ही लीला है। बिना देर किये मैं तुरंत ही उस व्यक्ति के पास गया और उससे पूछा कि क्या वह सच में बंगलोरे में ट्रांसफर चाहता है, जैसे ही उसने सकारात्मक उत्तर दिया, तब मेरी ख़ुशी की कोई सीमा नहीं रही। मेरा बाबाजी के पास शिर्डी में रहने का सपना सच हो रहा था, जो बाबाजी ने ही मुझे दिया था।तुरंत ही मैंने अपने कमरे में जाकर बाबाजी के सामने माथा टेका, मेरी आँखों से आँसू बहने लगे और मैं एक शब्द भी नहीं बोल पा रहा था।

मुझे इस पवित्र स्थान शिर्डी के पास नौकरी देने के लिए बाबाजी का मैं हमेशा आभारी रहूंगा। इस पूरे अनुभव में लगभग 6-7 महीने लगे लेकिन बाबाजी की उपस्थिति मुझे हर क्षण महसूस हुई । अब मैं अक्सर शिरडी जाता हूँ और यह सब बाबाजी की कृपा से ही संभव हुआ है।अब जब भी मैं इस अनुभव को शुरू से, जब मैं मर्चेंट नेवी में शामिल होने वाला था और अब तक, जो मैं पुणे में नौकरी कर रहा हूँ, इन सभी घटनाओं के बारे में सोचता हूँ, तो यह समझ चूका हूँ बाबाजी ने इतनी अच्छी तरह से सब कुछ कैसे व्यवस्थित किया। वह मुझे शिर्डी के पास बुलाने की योजना बना रहा थे जो सब कुछ उनके द्वारा ही सुनियोजित था। वह हमारे जीवन का तार खींचने वाले हैं। बाबाजी की कृपा से सब कुछ होता है। अपने जीवन को बाबाजी को सौंप दो, वह निश्चित रूप से इसकी देखभाल करेंगे। धैर्य रखें और उस पर विश्वास रखें। बस हमें श्रद्धा और सबुरी चाहिए। ओम साई राम।


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